Jay ki baten :::: जय की बातें
रविवार, 2 सितंबर 2012
poor nadi
पूर नदी आँखों में देखी
चाल में थी एक मादकता
तुमको देखूं
चाहूँ
कि
तुममें डूब जाऊं .
शनिवार, 9 जून 2012
दियाबत्ती के समय
घर आ जाना
माँ चिंता
करेगी
अपनी क्या कहूँ .
शुक्रवार, 4 मई 2012
saya
साया थक कर
सो गया
मैं यहाँ से अब
हिलूं भी तो कैसे.
शनिवार, 28 अप्रैल 2012
चादर
चादर चढ़ा रहे हैं
मज़ार पर हजार
बेवा शर्मसार है वहीँ दुआर पर.
शनिवार, 21 अप्रैल 2012
बारिश में
gumहो गई
तुम तक पहुँचने की
सारी pagdandiyan..
शनिवार, 14 अप्रैल 2012
इतना भी
इतना भी क्या
खुशकिस्मत होना
जिसको भी देखें अपना होता जाए.
रविवार, 8 अप्रैल 2012
मोम होते हैं
एकाध तरफ से
तो पत्थर भी .
नई पोस्ट
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
मेरे बारे में
जय श्रीवास्तव
उज्जैन, मध्यप्रदेश, India
कुछ खास नहीं !
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें