गुरुवार, 8 जनवरी 2009

हम गायेगे गीत गुनाहगारों के साथ , हमें पता है हश्र हमारा क्या होगा

-----धूल उड़ाते ओझल हुए घोडे ----------रद्द हर उड़ान , धूसर हुआ आसमान ------। बालू नाच देखना चाहता था करीब से , कि फरमान आया राजा का , आंधी से बचो, वरना किससे वसूलेंगे हम लगान । हमने नाच देखा पूरा और पीठ कर दी सामने। 'अपने पांवों पे खड़े हम ही होंगे, दो पांवों पे कब खड़े होते हैं चोपाये । '

1 टिप्पणी:

aap svasth rahen.

मेरे बारे में

उज्जैन, मध्यप्रदेश, India
कुछ खास नहीं !