-----धूल उड़ाते ओझल हुए घोडे ----------रद्द हर उड़ान , धूसर हुआ आसमान ------। बालू नाच देखना चाहता था करीब से , कि फरमान आया राजा का , आंधी से बचो, वरना किससे वसूलेंगे हम लगान । हमने नाच देखा पूरा और पीठ कर दी सामने। 'अपने पांवों पे खड़े हम ही होंगे, दो पांवों पे कब खड़े होते हैं चोपाये । '
विचारपरक लेखन के लिए साधुवाद !
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