Jay ki baten :::: जय की बातें
गुरुवार, 22 जनवरी 2009
आंसू हमारे ओस से धुले हुए
जो सर पे हमें बिठाते है, वे ही सर से हमें गिराते हैं.---गुजर हमारी कब तक होगी इन तुले हुए दानों पर ; जमीं पे बस्ती तुम्हारी होगी ,हमारी है आसमानोंपर .
1 टिप्पणी:
बेनामी
शुक्रवार, 23 जनवरी 2009 को 4:45:00 am GMT-8 बजे
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