सूखे पत्तों पर किसने धरे विदाई के पांव
उखड़ गया खामोश सारा मंजर
मैं देख रहा था उँगलियों की मेहंदी
ये रीत क्यों ? ये प्रीत क्यों ?
aap svasth rahen.
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aap svasth rahen.