Jay ki baten :::: जय की बातें
शनिवार, 6 जून 2009
शिकायत तुमसे कहाँ
चादर चढा रहे हैं
मजार पर हजार
बेवा शर्मसार है वहीं दुआर पर
1 टिप्पणी:
उम्मतें
रविवार, 7 जून 2009 को 12:18:00 am GMT-7 बजे
भाई जय शायद जीवन और नियति यही है !
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जय श्रीवास्तव
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भाई जय शायद जीवन और नियति यही है !
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