छुप जाओ.जाओ। अपने अर्थों को फेंक-२ कर। किसी और अर्थ को मैं शब्द दे दूंगा।
आसमान की छाया में चलता हुआ मैं थक गया था। आसमान मैंने बंद किया और घर में आ गया।
दो नाखूनों के बीच दिल- सी किसी चीज को रखा और पट की आवाज आ गई थी।
कमरा है दिमाग, अलमारी से निकाल-२ कर यहाँ- वहां की बातें ,खिड़की से फेंक दी और टूटी कुर्सी पर बैठा दिया ख़ुद को।
अत्यंत विचारपरक !
जवाब देंहटाएंआपकी अभिव्यक्ति शैली की दाद देनी पडेगी।
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शानदार रही लखनऊ की ब्लॉगर्स मीट
नारी मुक्ति, अंध विश्वास, धर्म और विज्ञान।
आपकी इस लगन को मेरा सलाम पहुंचे।
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शानदार रही लखनऊ की ब्लॉगर्स मीट
नारी मुक्ति, अंध विश्वास, धर्म और विज्ञान।