सोमवार, 7 दिसंबर 2009

ओ आते साल---------और फैंकी हुई बातें

छुप जाओ.जाओ। अपने अर्थों को फेंक-२ कर। किसी और अर्थ को मैं शब्द दे दूंगा।
आसमान की छाया में चलता हुआ मैं थक गया था। आसमान मैंने बंद किया और घर में आ गया।
दो नाखूनों के बीच दिल- सी किसी चीज को रखा और पट की आवाज आ गई थी।
कमरा है दिमाग, अलमारी से निकाल-२ कर यहाँ- वहां की बातें ,खिड़की से फेंक दी और टूटी कुर्सी पर बैठा दिया ख़ुद को।

3 टिप्‍पणियां:

aap svasth rahen.

मेरे बारे में

उज्जैन, मध्यप्रदेश, India
कुछ खास नहीं !