अभी कल की ही बात थी. उम्र को पांव में डाल निकल पड़ा था मैं. तालमेल नहीं था , ताकत और सोच में. धूप और बचाव में. किसी भी तरफ से आ जाती थी गाड़ी , एक तरफ होते -२ फुटपाथ धकेल देता था सड़क तरफ. रफ़्तार जहाँ सड़क को पीछे फेंकती जा रही थी. सड़क पर लगे संकेतक खामोश हो गए थे.
सुन्दर अभिव्यक्ति ...हमेशा की तरह चिंतन परक !
जवाब देंहटाएंअभी कल की ही बात थी. उम्र को पांव में डाल निकल पड़ा था मैं. तालमेल नहीं था , ताकत और सोच में. धूप और बचाव में. किसी भी तरफ से आ जाती थी गाड़ी , एक तरफ होते -२ फुटपाथ धकेल देता था सड़क तरफ. रफ़्तार जहाँ सड़क को पीछे फेंकती जा रही थी. सड़क पर लगे संकेतक खामोश हो गए थे.
जवाब देंहटाएंअद्भुत ....!!