सोमवार, 10 मई 2010

kuch hone ke kagar par tha

अभी कल की ही बात थी. उम्र को पांव में डाल निकल पड़ा था मैं. तालमेल नहीं था , ताकत और सोच में. धूप और बचाव में. किसी भी तरफ से आ जाती थी गाड़ी , एक तरफ होते -२  फुटपाथ धकेल देता था सड़क तरफ. रफ़्तार जहाँ सड़क को पीछे फेंकती जा रही थी. सड़क पर लगे संकेतक  खामोश हो गए थे.

2 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति ...हमेशा की तरह चिंतन परक !

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  2. अभी कल की ही बात थी. उम्र को पांव में डाल निकल पड़ा था मैं. तालमेल नहीं था , ताकत और सोच में. धूप और बचाव में. किसी भी तरफ से आ जाती थी गाड़ी , एक तरफ होते -२ फुटपाथ धकेल देता था सड़क तरफ. रफ़्तार जहाँ सड़क को पीछे फेंकती जा रही थी. सड़क पर लगे संकेतक खामोश हो गए थे.

    अद्भुत ....!!

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aap svasth rahen.

मेरे बारे में

उज्जैन, मध्यप्रदेश, India
कुछ खास नहीं !