बुधवार, 3 दिसंबर 2008

तुम्हारा इंतजार

अभी अभी तो शाम हुई है ,
आसमान बादल को लपेट कर चाँद का टोप लगा कर निकल पड़ा है ,
निकल पड़ी है द्रश्यों की फ़ौज ,
रौशनी के टीले ,
खेत दर खेत जाते पंछी ,
चर्र चपर्र की आवाजें ,
ऐसे में बस तुम्हारा इंतजार है !

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aap svasth rahen.

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