Jay ki baten :::: जय की बातें
बुधवार, 3 दिसंबर 2008
लगातार
आज एक ख्याल और आया चलदें दूर कहीं उस छोर पर जहाँ मौन ही मौन हो एहसास ही अहसास हो रंग ही रंग हों कश्ती लेके कोई बैठे थोडी देर ले जाए फिर मौन एहसास और रंगों के पर लगातार लगातार ----
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