हमें ये तो पता नहीं कि महीने २८/२९ /३०/३१ तारीख पर ही क्यों ख़त्म होते हैं और वे यहाँ से शुरू क्यों नहीं होते ? कौन जानता हैं कि महीने १/२/३/४ या किसी और तारीख पर ख़त्म होते तो क्या फ़र्क पड़ता ? हमें तो ये भी पता नहीं कि .... ये दिन /महीने / साल इसी शक्ल -ओ - सूरत में क्यों हैं ? अगर ये सब रूप / रंग / वजन / में किसी और तरह के होते तो क्या फर्क पड़ता ?
पर हमें ये तो पता है कि हमारे "अस्तित्व की शुरुआत और अंत " केवल प्रेम है ! अब दिन /महीने / साल /नव वर्ष , कहाँ से शुरू और कहाँ पर ख़त्म हों कोई बात नहीं ?
मगर हम सब एक दूसरे के अनुराग / प्रेम और सिर्फ़ प्रेम में लिप्त रहें यही दुआ है !
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aap svasth rahen.