प्रिय जय तुम्हें स्मरण होगा कि मुद्दत पहले तुमने मल्लिका साराभाई को भारत भवन के किसी कार्यक्रम के दौरान काफी निकट से देखा था और तुमने जगदलपुर लौट कर ये किस्सा बताया था कि डांस परफार्मेंस के बाद वह किस तरह से गौरान्वित /अभिमानिनी , सिगरेट से धुंवें के छल्ले निकाल रही थी और अपने अशोक जी अपनी अफसरी को ताक पर रख कर उसके प्रति काफी तरल व्यवहार कर रहे थे और तुम्हे उनका यह आचरण काफी भोंडा लगा था ! इसी वक्त के आस पास उसे एक दो फिल्मों में नायिका बतौर देखा था मगर अभिनय जमा नहीं ! तब से मन में मल्लिका साराभाई की एक छवि घर कर गई थी कि जिसमे बड़े धनाढ्य परिवार की आधुनिका कन्या , शौकिया तौर पर नृत्यांगना होकर संस्कृति कर्मी बन जाती है ! उसकी आधुनिकता /प्रगतिशीलता सिगरेट के धुंवें और छोटे छोटे बालों ( शायद बाब्ड हेयर ) से प्रस्फुटित होती है ! भले ही उसका भारतीयता / बौद्धिकता से कोई सरोकार हो के ना हो !
यह एक सुखद संयोग है कि १७.१२.०८ को दैनिक भास्कर में मल्लिका साराभाई को एक सामाजिक कार्यकर्त्ता के रूप में पढ़ा ! चूँकि "कानून" को लेकर लगभग "इन्ही" ज़ज्बातों को अपने ब्लाग में लिख चुका था ! तो यूँ समझो कि मुझे मल्लिका की हमख्याली / सोच , एक बहुत बड़ा लेसन दे गई है !
.....वो ये कि किसी भी व्यक्ति को उसके बाहरी रंगरूप और आचरण के आधार पर पहचानने में भूल हो सकती है और पिछले कई बरसों से मैं यह भूल कर रहा था ! मल्लिका को केवल शहरी तितली और शौकिया नृत्यांगना मानना मेरी भूल थी ! दरअसल उसके ख्यालात भी उसकी तरह साफ सुथरे और खूबसूरत हैं !
प्रिय अली , मुझे पता होता तो तब ही मल्लिका के बारे में तुम्हें क्लियर कर देता . हाँ फ़िल्म उसकी ठीक नहीं थीं.---------------------------------------मुझे वो सब स्मरण है .डांसर अच्छी है वो .
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