शुक्रवार, 5 दिसंबर 2008

इतने दिनों में .......

तुम्हे याद होगा कि रमई को हैंडपंप नें धोखा दे दिया था और हम दोनों ने लगातार दो सुबह दलपत सागर में नहाकर काम चलाया था हालाँकि पानी और घाट दोनों ही इस काबिल न थे ! दलपत सागर आज भी वैसा ही है !
और इतने दिनों में........... दलपत सागर में नहाने का मेरा रिकार्ड तुम्हारे साथ वाले आंकडे पर अटका हुआ है !
तुम्हे पता है कि उन दिनों अपनी सेहत किसी को धमकाने के लायक तो कतई भी नहीं थी ! शायद आस्तीन मोड़ने से जिस्म में ऊर्जा का अहसास होता होगा इसीलिए ...फिलहाल आदत बरक़रार है !
पैदल यानि कि प्यादे से वजीर होने में करीब १३ साल लगे थे और वजीर हो जाने में ही अपने थुलथुले होने का राज़ छुपा है !
मुझे तुम्हारे काफी बाद पता चला कि बीबी शौहर को जानवर की तरह ठूंस ठूंस कर क्यों खिलाती है !
यार अब तो ख़ुद को आईने में देखने का दिल भी नहीं करता !

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aap svasth rahen.

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