शुक्रवार, 9 जनवरी 2009

जेबदार कोट ,टोपा और मफलर------ठंडे हाथः

छुट्टे पैसे -से गिर पड़े ,दिन एक साथ , बहुत सारे। पिछले साल। और यूँ पिछले सालों मैं। घड़ी मैं ढेर सारे कांटे। चलती घड़ी के। थमी नब्ज -----पर टिक-२ करती ----। फटे समय-------गिरते दिन------, कहीं से आगया तुम्हारा हाथ-------उसमें तक़दीर -रेखा खूब बड़ी थी। शामिल रेखा ?

1 टिप्पणी:

aap svasth rahen.

मेरे बारे में

उज्जैन, मध्यप्रदेश, India
कुछ खास नहीं !