उँगलियों में फंसी रह गई हैं तुम्हारी जुल्फें। सहलाता हूँ ,जब छूने की इच्छा होती है। और ये ;जुल्फों से बड़ी होती जाती है। तुम अपने पास न रोक सकोगी ,इनमें फंसी अपनी बेबसी ------तमन्नाएं -------अगन ------थकन ----और -और ख़ुद को। मेरे गीत मुझे सीधे खड़े पहाडों पर ले जा रहे हैं। और तुम्हें मैं तुम्हारी अधीरता के संग।
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aap svasth rahen.