मंगलवार, 27 जनवरी 2009
आइसक्रीम का पहाड़
पहाड़ थक कर बैठा, नदी के तट, पीने लगा जल। मछली ने उससे कहा, मुझे ऊपर , खूब ऊपर ले चलो। पहाड़ ने कहा, ऊपर मेरे पानी नहीं है, तुम कैसे रहोगी। नन्ही मछली बोली, मैं थोड़ा पानी ले चलूंगी। पहाड़ ने कहा, फ़िर चलो। नन्ही बोली फ़िर कुछ याद करके, मैं मां को भी ले चलूँ? ले चलो, पर पानी और ले चलना होगा। -------नन्ही तो नन्ही थी। कहाँ मानने वाली थी। अपने पिताजी, अपने भाई- बहिन ,मित्र सबको साथ ले चली। पहाड़ भी पहाड़ था। उसने आपको नदी में गहरे उतार लिया । और लगा उससे खेलने। नन्ही ,अब पहाड़ बन गई थी।
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मेरे बारे में
- जय श्रीवास्तव
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- कुछ खास नहीं !
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aap svasth rahen.