कमाल है कि फूट रहे है बोल उसके मुंह से। कमाल है कि उसे नींद आने लगी है । उसकी ऑंखें डूब गई हैं अथाह जल में। उसकी रातें लिपट गई हैं अंधेरे से। उसकी गली में जब होगी अपनी गुजर, वे भी छलकेंगे उभरे गालों पर ,आंसुओं की तरह। ---'फिक्र करते थे कि रुक जायें न कहीं वो रोके से ,बाँध लिए हमने हाथ झुकाकर सर। '
" उसकी ऑंखें डूब गई हैं अथाह जल में। उसकी रातें लिपट गई हैं अंधेरे से। "
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