Jay ki baten :::: जय की बातें
मंगलवार, 20 जनवरी 2009
एक एहसान करो हम पर क़यामत सी गिरो तुम
' रुकी निगाह से बना रहा था मैं एक खाब , तुम आए सामने , मानी बादल गए। ' ---------'पूजा का दिया बुझ जाने दो, किस मुंह से अब तुम्हारे सामने आऊं। '
1 टिप्पणी:
बेनामी
शुक्रवार, 23 जनवरी 2009 को 4:17:00 am GMT-8 बजे
अब आ भी जाओ भाई साब कोई कुछ नहीं कहेगा
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अब आ भी जाओ भाई साब कोई कुछ नहीं कहेगा
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