शुक्रवार, 27 मार्च 2009

मेरे हिस्से के ,मेरे हाथ आए

छटपटाहट । दूर जाने ,तेज़ जाने,उड़ने ,अपने से दूर-किसी भी तरह.पसंदीदा गाना सुनना ,कहानी पढने में लग जाना.एक दृष्टि से अपने से भागने के सिवा क्या है? हर गाड़ी अपने पर ही रुकना चाहिए। वो गाना है —‘हमी तक है हर इक मंजिल ,चले आओ------‘.मेरे दोनों कांटे मुझ पर ही रुके हुए हैं.

1 टिप्पणी:

  1. आज बरसों बाद तुमने फोन पर जाने पहचाने लोगों से अनजाने जैसी बातें की ,फिर गाड़ी क्यों रूकती तुम्हारे दर पर !

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aap svasth rahen.

मेरे बारे में

उज्जैन, मध्यप्रदेश, India
कुछ खास नहीं !