गुरुवार, 7 मई 2009

उड़ता हुआ कागज आजाद हुए शब्द और उनसे उनके अर्थ

मिला तो हुआ हूँ मगर ढूढ़ता हूँ
दुआओं में अपनी असर ढूंढ़ता हूँ
उठाते समय नहीं साथ देते
हाथों में अपने क़सर ढूंढ़ता हूँ
रेती सा मैं अब बिखरने लगा हूँ
पत्थर का मैं इक शहर ढूंढ़ता हूँ

अली साहब , आपके लेख पर मैं अपनी गजल के कुछ शेर बतौर बधाई लिख रहा हूँ

1 टिप्पणी:

  1. आपके शेर पढकर आपके दिल के जज्‍बात का इल्‍हाम हुआ। अच्‍छा लगा।

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    SBAI TSALIIM

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aap svasth rahen.

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