बुधवार, 24 जून 2009

जय हे जय हे जय जय जय जय हे

हम तथ्यों पर जाते हैं और रूखे और सूखे खडंग हो जाते हैं। जरा मारो कंकर , बिखर जाते हैं। ----------हम जीते, चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न, भाव घटे ,देश आगे बढ़ रहा है, जैसे शीर्ष -वाक्य हमें शान्ति और विजेता -भाव देते हैं। -------अच्छा सुनना , देखना,पढ़ना हमें आनंद देता है। -----विश्लेषण में जायें तो ये कि प्रत्येक में ईश्वर अंश है। ईश्वर का स्वभाव है स्तुति । इसको देख सकते हैं यूँ हम। हमें ही कोई बुरा कहता है, आलोचना करता है , हमें बहुत बुरा लगताहै। भले ही ग़लत हों , हमें कोई ग़लत न कहे। हमें यह भी लगता है कि हमें सब पता है,पर तुम कौन , हमें ग़लत कहने वाले। --------हम जैसे भी हों , हमारी तारीफ करो। स्तुति करो। ----जब अंश होने पर हम ऐसा सोचते हैं और तथ्याधारित सत्य या दृष्टिकोनित सत्य में अपनी स्तुति योग्य कोई भूमिका न पाते देख बेजान हो जाते हैं , तो झूठे शीर्ष-वाक्य हमें शान्ति और विजेता -भाव क्यों न देंगे। कहने का आशय यह कि हमें क्यों गर्व करने और लाभ देने वाली चीजें और खबरे क्यों अच्छी लगती हैं।

2 टिप्‍पणियां:

aap svasth rahen.

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उज्जैन, मध्यप्रदेश, India
कुछ खास नहीं !