शुक्रवार, 14 अगस्त 2009

खूब करने की बारी अब हमारी

विचार को ऊँचाई ,प्रभाव के या सरलता के अनुपात में प्राप्त होती है। विचार हमारे पूर्वाग्रहों से जितने मुक्त होंगे,या होते जायेगे, हल्के होने से ऊपर उठेंगे और समझने में नीचे तक आते जाने के कारण व्यापक और उपयोगी होते जायेंगे। मुख्य बात अब ये हो रही है कि ऐसे विचार विलासिता की सामग्री हो गए है। अमल में नहीं ला रहे हैं लोग। इस स्थिति को कार्यशील नेतृत्व की तुंरत जरुरत है। कहीं न कहीं कुछ और करने की भी ,हालां कि जरुरी है।

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aap svasth rahen.

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