रविवार, 23 अगस्त 2009

रास्ते का पत्थर

मेरे ब्लॉग मुझे पूरा एकांत देते हैं.कुण्डी खटखटाता है कभी -कभार कोई। -------------मेरी आवाज मुझ तक पूरी की पूरी आ रही है। लौट कर। सब के पास कुछ न कुछ है हमेशा कहने को । नदी कहाँ मैं,जिसे जल चाहिए ही। पहाड़ भी कहाँ ,जिसे ऊंचाई चाहिए। नभ हूँ , जिसे थोड़ा-सा नीलापन चाहिए।

1 टिप्पणी:

aap svasth rahen.

मेरे बारे में

उज्जैन, मध्यप्रदेश, India
कुछ खास नहीं !