Jay ki baten :::: जय की बातें
बुधवार, 23 सितंबर 2009
सिपिओं मैं बंद बूंदों की तक़दीर
रुक सकता था तूफ़ान । रुक सकती थी बाढ़। रुक सकती थी धन कमाने की भूख। किसी भूखे बच्चे के माथे पर डिठोना लगा दिया होता।
1 टिप्पणी:
उम्मतें
शुक्रवार, 25 सितंबर 2009 को 7:02:00 am GMT-7 बजे
बढ़िया !
जवाब दें
हटाएं
उत्तर
जवाब दें
टिप्पणी जोड़ें
ज़्यादा लोड करें...
aap svasth rahen.
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
मेरे बारे में
जय श्रीवास्तव
उज्जैन, मध्यप्रदेश, India
कुछ खास नहीं !
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
बढ़िया !
जवाब देंहटाएं