चल देना ,कहा था आग ने ,चल दिए थे। भूख की आग इतना ही तो करती है। चेहरे और बदन को आकार देती मंजिलें , रंग के बिना होली का माहौल बनाती है। धुआं -२ शाम.रोटियां बनती हुई ,शराब देशी,बीडी, बच्चे बनते मकान के बालू के ढेर के खेल के हवाले--हाँ तो मैं आग की बस बात कर रहा था। टीवी देखता हुआ।
बच्चे बनते मकान के बालू के ढेर के खेल के हवाले--हाँ तो मैं आग की बस बात कर रहा था। टीवी देखता हुआ।
जवाब देंहटाएंबढ़िया !