शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2009

ऐसा न हो तो अच्छा

एक चलन है ----अपनी किसी भी बात पर समर्थन की उम्मीद करना। और हर बार। चुपचाप कोई रहे .ये भी सहन नहीं होता। पूरे वातावरण में व्याप्त ये सोच और उसका प्रभाव ,प्रदूषण के प्रचलित प्रकारों से अधिक होता है। सभी उम्र ,स्तर और स्थान के लोगों के पास इसके अधिकार हैं। काम न करने वालों के पास ये गहने शोभा नहीं देते। काम करने वाले तो खेर होशियार हैं।

2 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्कुल सही बात है और मजा तो तब आता है जब समर्थन न करनेवालों को या फिर चुप रहनेवालों को विरोधी खेमे में धकेल दिया जाता है...

    जवाब देंहटाएं

aap svasth rahen.

मेरे बारे में

उज्जैन, मध्यप्रदेश, India
कुछ खास नहीं !