सोमवार, 18 जनवरी 2010

शमशेर जन्म शताब्दी वर्ष पर साहित्यिक आयोजन

धनञ्जय ने कहा, कवि को इमानदार होना चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता कि कविता बहुत अच्छी हो और कवि ना हो। शमशेर जेनुइन शिविर थे। वे भी अपने बारे में बस यही कहते थे। धनञ्जय ने बताया, पचमढ़ी शिविर ,जो पहले लगा था, में हम लोग बच्चों को ज़ब कविता के बारे में बता रहे थे, शमशेर जी नोट्स ले रहे थे हम लोगों के। वे सरल, मृदुभाषी, और सही मानों में बड़े कवि थे। 'उषा'कविता में शमशेर सूर्योदय को किस खूबी से चित्रित करते हैं इसका विस्तृत वर्णन धनञ्जय जी ने किया।

महत्वपूर्ण कवि श्री चंद्रकांत देवताले ने कहा,शमशेर ईश्वर नहीं इन्सान थे। छोटा सा व्यक्ति खड़ा है। उसमे धरती के कितने ही घाव हैं। उनकी रेंज व्यापक है। 'ओ मेरे नेरुदा' में वे नेरुदा को याद करते हैं।

शमशेर के जन्म शताब्दी वर्ष में १३ जन.२०११ टक और भी आयोजन किये जायेंगे।

2 टिप्‍पणियां:

aap svasth rahen.

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