गुम होना अपने स्वभाव में इतना होगा ;पता न था / सरक ही तो गया था बटुए -सा ./ उम्मीदों को टेके देना आना चाहिए.था /चाय की दुकान आते ही पसर जाना चाहिए था./
पिछली पोस्ट पर टिप्पणी का विकल्प नहीं था डा.साब बस आज दुकान खुली देखी सो घुस आया हूँ और अब पसरने वाला हूँ :)
आदमी तभी तो गुम होता है जब उम्मीद साथ छोड़ देती है.
aap svasth rahen.
पिछली पोस्ट पर टिप्पणी का विकल्प नहीं था डा.साब बस आज दुकान खुली देखी सो घुस आया हूँ और अब पसरने वाला हूँ :)
जवाब देंहटाएंआदमी तभी तो गुम होता है जब उम्मीद साथ छोड़ देती है.
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