रविवार, 28 दिसंबर 2008

दृष्टिकोण

खास और स्वस्थ दृष्टिकोण पर टिकना ही होगा . हम गजनी कट कटिंग करा रहे हैं. गरीब पालक दबाव में है, मोबाइल ,मोटरसाईकल ,जूते और जींस के. लड़कियां इज्जत हाथ में लिए घूम रहीं हैं मुहं पर स्कार्फ बंधेहुये. सोच घटिया और पोशाक नकली. हमारा पासवर्ड गांधीगिरी है न की गाँधी का आचरण. डीजे की आवाज में दब गई है किशोरों की अर्थपूर्ण अभिव्यक्तियाँ. ----------आज जरुरत युवा नेतृत्व की। युवा टीम की . उनसे ही सिर्फ़ आज के लिए हम सारे आने वाले कलों को बर्बाद कर रहे हैं. हमारे सोचने का तरीका कल्याण होगा सबका. उसे गजनी नहीं ,गज बनाना होगा.

1 टिप्पणी:

  1. वर्षों से सिनेमा हॉल का मुंह नहीं देखा इस लिए ये तो नहीं कह सकते की ग़ज़नी फ़िल्म अच्छी है या बुरी पर सुना है कि यह फ़िल्म मनोविकार /मनोरोग और हिंसा तथा प्रेम का मिला जुला उपक्रम है ! चूँकि फ़िल्म देखने भारी भीड़ जुटने की खबरें है तो कहना यही शेष है कि हमारे देश को मनोविकार / हिंसा के साथ प्रेम अच्छा लगने लगा है ?

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aap svasth rahen.

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उज्जैन, मध्यप्रदेश, India
कुछ खास नहीं !