बुधवार, 7 जनवरी 2009

पहाड़ गिर पड़ा मेरे कंधे पे -----आराम मिला

हमसे कोई न पूछे , किसी हमारे बारे मैं। हम हमारे कहाँ अब। ----------हम हो चुके -----हम चुके--------चुके हो हम --------जाआने किसके --------बिना हुए .अरे भाई ,हम हुए बोझ। भाग जाओ---- मुझमैं से -----ओ हकीकतों ------ओ ख्वाबों ----जाओ कहीं काम आओगे .'मैं अकेले ही में मजे मैं था , मुझे आप किस लिए मिल गए'-----------

1 टिप्पणी:

aap svasth rahen.

मेरे बारे में

उज्जैन, मध्यप्रदेश, India
कुछ खास नहीं !