उड़ रही थी चील । अपनी ऊंचाई पर। वो उतरी इस पोस्ट पर । लेके कुछ, फ़िर वहीं पे थी। मैं यहीं पे था। ----हो रही थी भोर । किरणें उतरीं इस -----पर। ले के कुछ, फ़िर वहीं पे थीं। मैं यहीं पे था। -----हो रही थी बारिश। बूंदें उतरीं इस ---पर। दे के सब- कुछ ,अब यहीं पे थीं। मैं ,मुझे पता नहीं, कहाँ पे था?
गणतंत्र दिवस की आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं
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