मेरे ब्लॉग मुझे पूरा एकांत देते हैं.कुण्डी खटखटाता है कभी -कभार कोई। -------------मेरी आवाज मुझ तक पूरी की पूरी आ रही है। लौट कर। सब के पास कुछ न कुछ है हमेशा कहने को । नदी कहाँ मैं,जिसे जल चाहिए ही। पहाड़ भी कहाँ ,जिसे ऊंचाई चाहिए। नभ हूँ , जिसे थोड़ा-सा नीलापन चाहिए।
A slab of nuclear matterial, waiting to achiev it's "critical mass".
जवाब देंहटाएंGreat...